शीघ्रपतन किन कारणों से होता है ?

शीघ्रपतन किन कारणों से होता है ?

शीघ्रपतन के लक्षण –
सम्भोग के वक्त, समय से पहले वीर्य का
जल्दी निकल जाना शीघ्रपतन है। जब लिंग  प्रवेश (एंट्री)के साथ ही “एक्सिट” होने लगे या फिर, स्त्री अभी चरम पर न हो और व्यक्ति का स्खलन (झड़-जाना ) हो जाए तो यह शीघ्रपतन (Premature Ejaculation) है।

शीघ्रपतन के साइड इफ़ेक्ट—
 स्वयम से लाचार वअसंतुष्टि होना, ग्लानि, हीन-भावना,नकारात्मक सोच या अपने-आपको कोसना, कमजोर समझना,

क्यों होता है– शीघ्रपतन
अधेड़ अवस्था में बढती आयु की वजह से जब लिंग की  इन्द्रीयों की नसें कमजोर व ढीली हो जाने से लिंग में ढ़ीलापन आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इस कारण  से वीर्य को रोके रखने की शक्ति क्षीण (ख़तम) हो जाती है। ऐसी खराब स्थिति को आयुर्वेद ग्रंथों में शीघ्रपतन (Premature ejaculation) कहा जाता है। डर, भय, असुरक्षा, छुपकर सेक्स, शारीरिक व मानसिक परेशानी भी इस समस्या का एक बहुत बड़ी वजह हो सकता है। शीघ्रपतन एवं यौन अक्षमता के कुछ कारणों में तनाव, मनोवैज्ञानिक मुद्दों, हृदय रोग या अन्य चिकित्सीय स्थितियों, नशीली दवाओं के उपयोग, शराब पीना भी  शामिल हो सकता है।

इसके इलावा यह कारण भी शीघ्रपतन के लिए जिम्मेवार हैं 

1- खान-पान की आदत का ख़राब होना
2- उचित मात्रा में समय पर भोजन न करना
3- विटामिन्स की कमी होना,
4- पाचन तन्त्र कमजोर होना।
5- लगातार पेट खराब रहना।
6- लम्बे समय तक कब्ज रहना।
7- खून व भूख की कमी
8- हारमोंस का बहुत अधिक प्रभावित होना
9- हमारे शरीर में वीर्य का कम मात्रा में बनना,
10- लिंग  की नसों का सिकुड़ जाना
11- दिमाग में खुश्की का बढ़ जाना
12- हमेशा चिन्ता, तनाव का बने रहना

  यहाँ जाने के शीघ्रपतन को कैसे रोकें।      
          
  इसे भी देखें - 

शीघ्रपतन में शिलाजीत एक वरदान सामान

अश्वगंधा एक चमत्कारी औषदि 

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